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डिप्रेशन से बढ़ती उम्र वाले मनुष्य पर पड़ रहा है असर, ये उपाय से तुरंत मिलेगा फायदा

लखनऊ: मानसिक स्थिति के संतुलित रहने का मतलब ये माना जाता है कि स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ना समझा जाता है। यह आज के समय में और भी महत्वपूर्ण इसलिए होता है क्योंकि अब इंसान एक साथ कई मोर्चों पर परेशान हो रहा है। इस भागदौड़ में भावनात्मक स्तर पर असर पड़ना लाजमी समझा जाता है। जीवन में कई स्थितियां ऐसी मानी जाती है जो इंसान को निराशा की ओर धकेलने में मदद करती है। अगर कोरोना महामारी को देखा जाए तो तो इस दौर में लोगों ने अपनी जमा-पूँजी के साथ ही अपनी नौकरियां, अपने करीबी लोगों आदि को खोना शुरु कर दिया है।

इस सबका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ना शुरु कर दिया है। ऐसे में डिप्रेशन जैसी स्थिति का बनना सामान्य बात मानी जा रही है। भावनात्मक उथल-पुथल किसी के भी साथ होना सामान्य समझा जाता है। कुछ लोग इस स्थिति को संभालने में सक्षम होते हैं और बहुत जल्दी, बिना किसी नुकसान के इससे बाहर आना शुरु हो जाता है। जबकि कई लोग ऐसे होते हैं जो इस उथल-पुथल में और गहराई में चलना शुरु करते हैं।

रिटायरमेंट के बाद का झटका

शायद यह लोगों के लिए अजीब माना जाता है, लोगों को अक्सर लगना शुरु हो जाता है कि डिप्रेशन उन लोगों को होता है जो किसी तकलीफ या मुश्किल से गुजर रहे होते हैं। यह एक भ्रान्ति मानी जाती है। डिप्रेशन की स्थिति कई बार ऐसे लोगों के साथ भी बनती है जिनका जीवन दिखने में देखा जाए तो सामान्य और आरामदायक हो जाता है, जिनको धन, साधन या किसी भी चीज की कमी नहीं हो पाती है। आंकड़े बताते हैं कि रिटायरमेन्ट के बाद 80 प्रतिशत से अधिक लोग डिप्रेशन में जाने लगते हैं। यह एक अनुमानित आंकड़ा है, तथ्य इससे कहीं ज्यादा भी होने की संभावना बनी रहती है। लेकिन इन सारे लोगों में डिप्रेशन के लक्षण गंभीर नहीं रहते हैं।

इन बातों पर देना होता ध्यान

-यदि आपके परिवार में डिप्रेशन पहले से मौजूद है तो 50 वर्ष की उम्र के बाद परिवार के सदस्यों का नियमित परीक्षण जरुर करवा सकते हैं।
-महिलाओं में मेनोपॉज की स्थिति के बाद डॉक्टर के परामर्श से काउंसिलिंग के सेशंस ले सकते हैं।
-रिटायरमेंट के बाद के लिए पहले से ऐसी गतिविधियों की योजना बनायें जो आपको रचनात्मक रूप से व्यस्त रखे। उदाहरण के लिए सामाजिक मुद्दों पर काम कर रही किसी संस्था के साथ जुड़ना, कोई कला सिखाने वाली संस्था की सदस्यता लेना, बागवानी या अपनी किसी हॉबी को पूरा करने के साथ
-यदि घर के किसी बुजुर्ग या बड़ी उम्र के सदस्य के व्यवहार को लेकर असामान्यता नजर आये तो चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना होता है।
-यदि घर के बुजुर्ग अकेले रहते हैं, बच्चे घर से दूर हैं तो समय समय पर बुजुर्गों के साथ समय गुजारने का प्रयास करे।

-दूरियां ज्यादा हों तो ऑनलाइन भी मीटिंग्स कर सकते हैं।
-डिप्रेशन का इलाज समय पर शुरू किया जाए तो ये नियंत्रित हो सकता है लेकिन इसके लिए परिवार या मित्रों-शुभचिंतकों का साथ चमत्कारी असर भी डालता है जिसका ध्यान देने की जरुरत है।
-डिप्रेशन का इलाज लेते समय पहले से चल रही सभी दवाइयों की जानकारी डॉक्टर को अवश्य दिखा सकते हैं। इससे उन्हें दवाइयों के कॉम्बिनेशन तय करने में मदद मिलेगी क्योंकि कुछ अन्य दवाएं, डिप्रेशन की दवाओं के साथ मिलकर विभिन्न साइड इफेक्ट्स पैदा करने में मदद करती है।
-दवाइयों के साथ, फिजिकल एक्टिविटी का भी ध्यान रखना होता है और रोज योगा, ध्यान, पैदल चलने जैसी गतिविधियों को जरूर अपनाना अहम होता है।

अंज़र हाशमी, उत्तर प्रदेश