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राजस्थान मे कांग्रेस सरकार भी हिंदुत्व एजेंडे पर, वैदिक शिक्षा व संस्कृत शिक्षा के लिए बना रहे अलग एजुकेशन ट्रस्ट

राजस्थान। राजस्थान की गहलोत सरकार ने फैसला लिया है कि वह आने वाले चार-पांच महीनों में संस्कृत भाषा और वैदिक शिक्षा के उत्थान के लिए एक बोर्ड का गठन करेगी. इसमें वैदिक शिक्षा और संस्कृत भाषा को पुनर्जीवित करने के लिए काम किया जाएगा. 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव (Rajasthan Assembly Election) में कांग्रेस (Congress) ने अपने मेनिफेस्टो में वादा किया था कि वह अगर सरकार में आई तो संस्कृत भाषा को आगे बढ़ाने के लिए काम करेगी. अब अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) अपने उसी वादे को पूरा कर रहे हैं. लेकिन इसे आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election) और राजस्थान के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी लिया गया फैसला बताया जा रहा है
दरअसल जिस तरह से ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने बीजेपी (BJP) के कट्टर हिंदुत्व के आगे सॉफ्ट हिंदुत्व का दांव चला और बड़ी जीत दर्ज की अब उसी से सीख लेते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार भी बीजेपी के कट्टर हिंदुत्व के सामने संस्कृत भाषा और वेदों के पुनरुत्थान के लिए काम करके सॉफ्ट हिंदुत्व का दांव चल रही है.

संस्कृत शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष गर्ग के मुताबिक जल्द ही रिपोर्ट के आधार पर मॉड्यूल बोर्ड के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा और 4 से 5 महीनों में यह बोर्ड बनकर तैयार हो जाएगा. ऐसा नहीं है कि गहलोत सरकार ने सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर यह पहला कदम बढ़ाया है, इसके पहले भी उनके कई ऐसे फैसले हैं जो दिखाते हैं कि राजस्थान में कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व को लेकर कितनी सक्रिय है.

राम मंदिर के लिए भी दिखा सॉफ्ट हिंदुत्व

भारतीय जनता पार्टी ने अपने वादे के मुताबिक अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने का काम शुरू कर दिया है. लेकिन इसमें जो सबसे बड़ी मुसीबत आ रही थी वह थी मंदिर निर्माण के लिए गुलाबी पत्थरों का मिलना, लाल गुलाबी पत्थर राजस्थान के बंसी पहाड़पुर में मिलते हैं. लेकिन राजस्थान सरकार ने यहां 2016 से ही खनन पर रोक लगा दी थी. हालांकि जब गहलोत सरकार से मंदिर निर्माण के लिए पत्थर की बात की गई तो उन्होंने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के लिए इन गुलाबी पत्थरों की कोई कमी नहीं होगी.
इसके बाद अशोक गहलोत ने राजस्थान सरकार का फैसला वापस ले लिया, जिसकी वजह से खनन पर रोक लगी थी. यह फैसला नवंबर 2020 में लिया गया था. इसके बाद भी राजनीतिक गलियारे में चर्चा शुरू हो गई थी कि अशोक गहलोत सरकार सॉफ्ट हिंदुत्व के मुद्दे पर आगे बढ़ रही है।

शुभम जोशी