• Sat. Apr 20th, 2024

अमेरिका के साथ टेंशन में ईरान को हुआ लाभ

Aug 11, 2023 ABUZAR

ईरान ने अपनी मिसाइलों के लिए रैमजेट इंजन विकसित करना शुरु किया है। रैमजेट इंजन से काफी लाभ होता है। इस तरह की तकनीक सिर्फ चुनिंदा देशों के पास ही है। इस इंजन से ईरानी मिसाइलों की शक्तियां काफी बढ़ने जा रही है। ईरान रैमजेट इंजन से चलने वाली एक नई नौसैनिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण होने वाला है।

ईरानी मीडिया का दावा है कि रैमजेट से लैस मिसाइलें ईरान के दुश्मनों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में काफी प्रभावी भूमिका अदा करेंगी। ईरान वर्तमान में अमेरिका की आक्रामकता का सामना कर रहा है। अमेरिका ने ईरान के नजदीक हाल में ही अपने 3000 सैनिकों और दो युद्धपोतों को तैनात हो गया है।

ईरान ने बताया है कि उसकी नई मिसाइल में रैमजेट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह एक अडवांस एयर ब्रीथिंग इंजन होता है, जिसमें कोई बड़ा पार्ट नहीं होता जो मिसाइल के आकार पर प्रभाव डालने जा रहे हैं।

यह इंजन हवा में मिसाइल को तेज गति से आगे बढ़ाने में काम आता है। अब तक, रूस, चीन, भारत और अमेरिका सहित दुनिया भर में केवल कुछ ही देशों के पास रैमजेट तकनीक मानी जा रही है। इसस तकनीक के जरिए ही हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल को तेज गति से उड़ान भरने योग्य बनाया जाता है। रैमजेट इंजन से कम गर्मी निकलती है, जो हीट सीकिंग मिसाइलों को आसानी से चकमा दिया जा रहा है।

नौसैनिक क्रूज मिसाइलों में रैमजेट इंजनों के इस्तेमाल और सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के विकास से किसी भी सैन्य संघर्ष की स्थिति में ईरान की प्रतिक्रिया शक्ति में काफी बढ़ोतरी होने वाली है।

बुधवार को जारी हुई यह रिपोर्ट ईरानी फत्ताह मिसाइल के अनावरण के ठीक दो महीने बाद आई है। दावा किया जा रहा है कि ईरान की फत्ताह मिसाइल हाइपरसोनिक स्पीड से उड़ान भरने में सक्षम लग रहा है।