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देश में प्रायोजित खबरों का व्यापार और मुद्दों से भटकता आमजन

देश में फेक न्यूज की फैक्ट्रियां चल रही हैं , और वो भी लाइसेंस के साथ । इसका सबसे बड़ा उदाहरण है पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद की गतिविधियां । जश्न के नाम पर हुडदंग की तस्वीरें , बंगाल में तार तार होते लोकतंत्र की तस्वीरें और तो और एक पत्रकार को हिंसा का शिकार बता कर मृत घोषित कर देने वाली तस्वीरें सब की सब फेक निकली । हिंसा हुई है भयंकर हुई है 10 से ज्यादा लोगों की जान चली गई पर इसमें भी राजनीति का तड़का लगाने की ऐसी होड़ लगी इन फैक्ट्रियों को… कि चला दी फेक खबरों की एक्सप्रेस और कह दिया कि हिंदू खतरे में है। क्या किसी ने कहा कि देश का वोटर खतरे में है ? क्या ये कहा कि आम आदमी खतरे में है ? क्या किसी ने ये पूछा की आखिर ये खतरा क्यों है ? नहीं हम नहीं पूछेंगे क्योंकि हमे लिबरल, सेकुलर , राइट विंग, लेफ्ट विंग की लड़ाई जो लड़नी है । हम ही तो वो सिपाही हैं जो फ्रंटफुट पर दंगो की आग को भड़काएंगे और जो ये फेक न्यूज की फैक्ट्रियां चलाएगी उसको आगे पहुंचाएंगे ! उन 10 से ज्यादा लोगों का क्या जो इस हिंसा की भेंट चढ़ गए ? उन्हें इंसाफ दिलाने की बजाए उन्ही के नाम पर एक नई जंग का आगाज़ कितना सही है ? खतरे में देश है लेकिन हम पहले विचारों की लड़ाई तो लड़ ले । खतरे में हमारा लोकतंत्र है पर हम पहले पहनावे पर तंज तो कस लें । हमारे इसी रवैए को आप इन फेक न्यूज की फैक्ट्रियों का लाइसेंस समझिए । इसे कहते हैं प्रायोजित तरीके से आम जनता को ही मार कर उसके बाद आम जनता को ही कसूरवार बता कर , आम जनता को ही इंसाफ की लड़ाई लड़ने के लिए उकसाना । आपने देखा होगा मोहल्लों में जब कोई बात एक घर से दूसरे घर पहुंचती है तो उसमे 4 बातें और जोड़ दी जाती है और ये सिलसिला चलता रहता है और आखिर में जो बात होती है उसका तो कोई अता पता ही नहीं । कहने का मतलब बस इतना है कि हां हिंसा हुई है , लेकिन जो तस्वीरें उसके नाम पर शेयर की गई वो झूठी हैं … और आखिर में हिंसा या हिंसा में मारे जाने वाले लोगों का कोई अता पता ही नहीं । आधी जानकारी हमेशा हानिकारक होती है और हमारी ये अधूरी जानकारी इन्ही फेक न्यूज फैलाने वालों और व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी चलाने वालों का मनोबल बढ़ा देती है । और इन्हे मौका मिल जाता फिर दो समुदायों को लड़वाने का । अंत में दो बिल्लियों की लड़ाई में बंदर कैसे फायदा उठा जाता है आप बेहतर जानते हैं ।

मेघना सचदेवा