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जब इंद्रा गाँधी ने की तारीफ, तो पोते को क्यों हो रहा तंज ।

महात्मा गांधी के कहने पर अंडमान की जेल में बंद सावरकर ने अंग्रेजी सरकार के सामने दया याचिका दी थी। इस बयान के आने के बाद से ही एक बार फिर से विवाद छिड़ गया है। कांग्रेस पार्टी की तरफ से भी इस बयान को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। अंग्रेजों के सामने बार-बार माफीनामा दिया, लेकिन सच्चाई ये है कि दया याचिका उन्होंने खुद को माफ किए जाने के लिए नहीं दी थी, उन्हें महात्मा गांधी ने कहा था कि दया याचिका दायर कीजिए। महात्मा गांधी के कहने पर उन्होंने याचिका दी थी। महात्मा गांधी ने अपनी ओर से ये अपील की थी कि सावरकर जी को रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सावरकर जेल में बंद थे तो उन्होंने महात्मा गांधी से कैसे बात की? दो साल पहले भी सावरकर को लेकर कांग्रेस-बीजेपी में जुबानी जंग छिड़ी थी।राष्ट्रीय स्मारक संस्था के सचिव पंडित बाखले को लिखी चिट्ठी में इंदिरा गांधी ने सावरकर की जन्म शताब्दी को लेकर उनकी योजनाओं के लिए सफलता की कामना की थी। साथ ही उन्होंने न केवल सावरकर को भारत का विशिष्ट पुत्र बताया था और यह भी कहा था कि उनका ब्रिटिश सरकार से निर्भीक संघर्ष स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अपना खुद का महत्वपूर्ण स्थान रखता है।इंदिरा ने सिर्फ यह चिट्ठी ही नहीं लिखी थी बल्कि उन्होंने सन् 1966 में सावरकर की मौत पर दुख भी जताया था। राहुल ने वहां मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बब्बर शेर और शेरनियां कहकर संबोधित किया था और कहा था कि कांग्रेस वर्कर किसी से नहीं डरता। राहुल ने इस दौरान यह भी कहा था कि उनका नाम राहुल सावरकर नहीं बल्कि राहुल गांधी है।

सतीश कुमार