• Mon. Jun 24th, 2024

G20 को लेकर आया अहम अपडेट

Sep 6, 2023 ABUZAR

भारत ने जी20 की अपनी अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ (वैश्विक दक्षिण) की आवाज बनने का विजन साझा किया है और देश ने चिंताओं को उठाने पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए बातचीत को आगे बढ़ाना सुनिश्चित करना शुरू कर दिया है।

”हमारी G20 प्राथमिकताएं न केवल हमारे जी-20 भागीदारों, बल्कि ग्लोबल साउथ में हमारे साथियों के परामर्श से भी तय की जाएंगी, जिनकी आवाज अक्सर अनसुनी कर दी जाती है.”

भारत ने जब 1 दिसंबर, 2022 को जी20 की अध्यक्षता संभाली तो पीएम मोदी ने देश की साल भर की अध्यक्षता के लिए कई दृष्टिकोण तय किए और ग्लोबल साउथ उनमें से एक माना जा तो था।

ग्लोबल साउथ का इस्तेमाल एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को लेकर किया जाता है, जबकि अमेरिका, कनाडा, यूरोप, रूस, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे आर्थिक रूप से विकसित देश ग्लोबल नॉर्थ (वैश्विक उत्तर) का हिस्सा हैं. अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए, भारत ने उन मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र की बैठकों और सम्मेलनों में उठाया है जो ग्लोबल साउथ देशों से संबंधित माना गया।

ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर भारत खरा उतरा है- एस जयशंकर

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि जब ग्लोबल साउथ के मुद्दों को उठाने की बात आती है तो भारत उस पर खरा उतरा है. विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ”जब ग्लोबल साउथ की बात आती है तो भारत कैसे खरा उतरा है? आम तौर पर तनाव की स्थितियां इरादे और व्यवहार का एक अच्छा इंडिकेटर (संकेतक) उपलब्ध कराती हैं. कोविड के दौरान लगभग 100 देशों में मेड-इन-इंडिया वैक्सीन भेजे गई और इस अवधि में दुनिया की फार्मेसी से लगभग 150 देशों ने दवाओं का आयात किया.”

जानकारी के मुताबिक अपनी अध्यक्षता की शुरुआत में भारत ने वर्चुअल माध्यम से जनवरी में 125 देशों के प्रतिनिधियों के साथ वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन की मेजबानी की. भारत ने यह भी सुनिश्चित किया कि इस साल मई में हिरोशिमा में जी7 शिखर सम्मेलन में यह क्षेत्र केंद्र बिंदु बना रहे.