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जज को अलोचना से बचाना नहीं होती कोर्ट की अवमानना

Nov 9, 2023

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने बताया कि अदालत की अवमानना का नियम किसी जज को आलोचना से बचाने के लिए नहीं माना जा रहा है। बल्कि इसका मकसद कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया में किसी शख्स की दखल को रोकना है। न्यायपालिका देश के नागरिकों के लिए है और हमेशा रहने वाली है।

अदालतों का काम यह सुनिश्चित करना है कि राजनीति अपनी सीमाओं में ही रहते हैं। 9 नवंबर को CJI चंद्रचूड़ के कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया, इस मौके पर उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान ये बातें बोली थी।

CJI ने कहा कि अगर कोई शख्स कोर्ट के फैसले का अपमान कर रहा है या उस पर कोई गलत बयान दे रहा है तो यह अवमानना है। कोई कोर्ट की कार्यवाही बाधित करता है या उसके आदेश का पालन करने में आनाकानी करता है, इसे भी अवमानना माना जाएगा। लेकिन किसी जज को लेकर अपनी राय व्यक्त करने पर कोर्ट की अवमानना का केस नहीं बनता।

उन्होंने कहा कि मैं यह मानता हूं कि कोर्ट की अवमानना के नियम का इस्तेमाल किसी जज को आलोचना से बचाने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट और जजों को अपने काम और फैसलों से अपनी प्रतिष्ठा बनानी चाहिए, यह कोर्ट की अवमानना के नियम से नहीं बनाई जा सकती है।