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डिप्रेशन को लेकर रखें खास ध्यान

Jun 10, 2023 ABUZAR

अवसाद में आए व्यक्ति की कोई अगर उसकी सबसे पहले सहायता करते हैं तो उसके परिजन हैं। यदि आपका कोई नजदीकी तनाव में रहे और असामान्य व्यवहार करने लगे तो सतर्क रहने की जरुरत है। उसकी निगरानी करें। यदि लगे कि वह अवसाद में पहुंचने लगा है तो उसके साथ अपना व्यवहार में बदलाव हो जाता है। ऐसा करके आप उसके सबसे बड़े सहायता करने वाले है।

मनोस्थिति गड़बड़ाने से अवसाद नजर आता है, जिसको आम भाषा में डिप्रेशन बोला जाता है। अतीत की घटनाओं व यादों में उलझने और भविष्य में होने वाली घटनाओं के दुष्परिणाम से डरकर पुरुष या महिला पहले निराशावादी होना शुरु हो जाते हैं, जो डिप्रेशन की शुरुआत है। इस प्रारंभिक अवस्था में से कुछ लोग शेष बची मानसिक दृढ़ता से खुद उबरना शुरु हो जाते हैं।

लेकिन कुछ तनाव का शिकार होना शुरु हो जाते हैं। डिप्रेशन के कई लक्षण हैं जैसे अकेले रहना, नींद न आना, सामाजिक मेल-मिलाप से बचने की कोशिश करते हैं, काम में मन न लगना, चिड़चिड़ा होना, शंका-आशंका के साथ उठना-बैठना और काम करना, किसी से कुछ शेयर नहीं करना और सदैव उदास बने रहना बी इसके अहम लशक्षन माने जा रहे हैं। तनाव की चरम अवस्था है, जीने की चाह खत्म हो जाना। ये भी सुना गया है कि अवसाद में रहने वाले लोग की इन चीजों का शिकार हो जाते हैं।

लगातार तनाव में रहने से कई प्रकार की समस्याएं होना शुरु हो जाती है। अवसादग्रस्त लोगों में सिरदर्द सामान्य लक्षण माना जाता है। अगर तनावग्रस्त व्यक्ति माइग्रेन से पीडि़त है तो अवसाद के कारण इसके लक्षण में बदलाव हो सकता है।

इससे सीने में जलन, दर्द और असहजता सा महसूस होना शुरु करते हैं। साथ ही हमारी पाचन प्रक्रिया में भी बदलाव हो जाता है। इसलिए तनाव में रहने वाले व्यक्तिके लिए जरूरी है कि वह धूम्रपान और शराब के नशे से बचने की जरुरत है। ऐसा कोई काम न करें जिससे आपको चिड़ हो। रेगुलर व्यायाम करने की जरुरत होती है। योगा और ध्यान से भी तनाव को कम करने को लेकर सहायता मिल जाती है।

इसके लिए रोजाना 10-15 मिनट का ध्यान करने से भी आपको लाभ मिल जाता है। फिर भी समस्या में सुधार न हो तो मनोचिकित्सक से संपर्क कर उन्हें अपनी समस्या विस्तार से जानकारी देने की जरुरत होती है और उनके द्वारा बताई गई सलाहों का पूरी तरह से पालन करने की जरुरत होती है।