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भारत मे लोकतंत्र की अधिकता और उसकी बदहाली से त्रस्त आमजन!

Apr 26, 2021 , ,

“भारत में कुछ ज्यादा ही लोकतंत्र है ” ये बात कुछ दिनों पहले आपने कई लोगों को बोलते हुए सुना होगा । कुछ महान लोग इसी बात का समर्थन भी करते हुए नजर आए थे । सही कहा था जिसने भी कहा था की ज्यादा लोकतंत्र है …इतना ज्यादा की देश का प्रधान सेवक बस बोलता रहा हर चुनावी रैली में , जब से वो उस कुर्सी पर बैठा है सिर्फ वो बोलता रहा…..एक बार फिर से बोला है की 500 से ज्यादा ऑक्सीजन प्लांट्स इंस्टॉल किए जाएंगे । इतना ज्यादा लोकतंत्र है की पहली लहर के बाद पूरी दुनिया के सामने ये चिल्ला चिल्ला कर बोला गया की भारत corona से जीत गया है । जाहिर सी बात है दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में लोकतंत्र कुछ ज्यादा ही है क्योंकि पूरा देश जब corona से जूझ रहा है तब विधानसभा और पंचायत चुनावों में ज्यादा से ज्यादा वोट देने की बात की जा रही है । ये ज्यादा लोकतंत्र इतना ज्यादा कैसे हो सकता है की जब मन आए मन की बात कर दी जाए और उसमे मन में जो आए बस बोल दिया जाए ? लोकतंत्र इतना ज्यादा हो गया है की टीवी के पत्रकार सिस्टम को तो कोसे लेकिन सिस्टम बनाने वालों पर आंच भी ना आने दे । हालात अब ये हैं की जितना ज्यादा लोकतंत्र उतनी ज्यादा बेरोजगारी और भूखमरी । इस सब का जिम्मेदार आखिर ज्यादा आजादी , ज्यादा लोकतंत्र ही तो है ! ट्विटर पर corona काल के दौरान हुक्मरानों से सवाल करने वाले सभी ट्वीट को डिलीट कराने के लिए कह दिया अब लोकतंत्र के ज्यादा होने की तो हद्द ही है … तभी तो आज देश में मौत का आंकड़ा भी ज्यादा हो गया ! जो आवाज बुलंद करता है उसे देशद्रोही बता दिया जाता है इससे ज्यादा लोकतत्र कहां देखा होगा जनाब आपने ?
सही कहा है जिसने भी कहा की लोकतंत्र ज्यादा है लेकिन गलत संदर्भ में कहा था । वो जानता है ये ज्यादा लोकतंत्र का हवाला देकर… हद से ज्यादा आजादी का इस्तेमाल कहां किया जा रहा था…. लेकिन शायद लोकतंत्र इतना ज्यादा है की उसके लिए भी खतरा और ज्यादा हो जाता अगर वो इनका समर्थन ना करता . आजाद भारत में आज लोकतंत्र इतना ज्यादा हो गया है की हवा के भी पैसे हैं और जान की कोई कीमत नहीं। वाकई अब इस लोकतंत्र को कम करने की जरूरत है !

-मेघना सचदेवा