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स्कूलों को खोलने में की जा रही जल्दबाजी, जानें क्या ये है सही समय

भारत के कई राज्यों ने तो स्कूल खुलने की तारीख भी घोषित कर दी है। मार्च 2020 में कोरोना आने के बाद देशभर के स्कूलों में फिजिकल क्लासेस बंद हो गई थीं। इसके बाद इस साल अप्रैल में इन्हें फिर से खोलने की तैयारी थी, लेकिन दूसरी लहर ने इस योजना पर पानी फेर दिया था। अब कोरोना केसेज में कमी आने के बाद फिर से स्कूल खोलने की तैयारी चल रही है। लेकिन इस बीच तीसरी लहर की आशंका भी जताई जा रही है। कोरोना के केसेज कम हैं। डॉ गुलेरिया ने कहा कि फिजिकल क्लासेज का चलना बहुत जरूरी है, इसलिए स्कूलों को खोला जाना चाहिए, लेकिन इसे बहुत ही बैलेंस ढंग से करना होगा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं, जिनके पास मोबाइल या कंप्यूटर नहीं है। यह छात्र लंबे समय से स्कूल नहीं गए हैं। ऐसे में वह बेहतर ढंग से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए फिजिकल क्लासेज बेहद जरूरी हैं। बहुत सी चीजें हैं जो तमाम कोशिश करके भी बच्चों को ऑनलाइन क्लास में नहीं सिखाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि अल्टरनेट व्यवस्था के साथ स्कूलों को खोला जा सकता है। इसके पहले यह सुनिश्चित होना चाहिए कि सभी स्टाफ, जिसमें कि बस ड्राइवर भी शामिल हों, उन्हें वैक्सीन लग चुकी हो। लेकिन प्राइमरी सेक्शन क्यों? इस सवाल के जवाब में डॉ. बलराम ने कहा कि बच्चे वायरल इंफेक्शन को बच्चों की तुलना में बेहतर तरीके से हैंडल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बड़ों के साथ बच्चे भी कोरोना की चपेट में आए थे।

सतीश कुमार (ऑपेरशन हेड, साउथ इंडिया)