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न्यूयॉर्क: यूक्रेन की स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में बुधवार को वार्षिक चर्चा हुई। इसमें भारत गणराज्य की ओर से संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि भारत को यूक्रेन में हो रहे संघर्ष से गहरी चिंता है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील करते हुए कहा कि वे शत्रुता को समाप्त करें और समस्या का हल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ढूंढें। उन्होंने कहा कि हमें यह समझना होगा कि हम अब युद्ध के दौर में नहीं हैं।

यूक्रेन में संघर्ष के कारण जान-माल का नुकसान हुआ है और लोगों की स्थिति बहुत खराब है, खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की। इस पर रुचिरा कंबोज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की ओर से चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों को अपने घर से पलायन करना पड़ा है और पड़ोसी देशों में पनाह मांगनी पड़ी है, नागरिकों और नागरिक संरचनाओं पर हमले हुए हैं, जो कि स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें क्षेत्र में हुए हालिया विकासों से परेशानी है, क्योंकि वे शांति और समन्वय के महत्वपूर्ण मकसद को प्राप्त करने में सहायता नहीं करते हैं।

रुचिरा कंबोज ने यूक्रेन के मुद्दे पर यूएनजीए में हुई वार्षिक चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि हम सभी पक्षों से अनुरोध करते हैं कि वे शत्रुता को बंद करें और समस्या का हल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तलाशें। हम सभी उस विश्व व्यवस्था का हिस्सा हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और सभी राष्ट्रों की प्रादेशिक अक्षुण्णता और संप्रभुता का सम्मान करती है। इन सिद्धांतों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है।

कंबोज ने कहा कि हम हमेशा से यही मानते हैं कि मानव जीवन को किसी भी समस्या का हल बनाना उचित नहीं है। शत्रुता और हिंसा से किसी का भला नहीं होता है। उन्होंने फिर से इस बात पर बल दिया कि मतभेदों और विवादों को हल करने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत है, हालांकि यह मुश्किल लग सकता है। हमें शांति के लिए सभी कूटनीतिक विकल्पों को सक्रिय रखना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से पूरे दक्षिणी क्षेत्र पर प्रभाव पड़ा है।

कंबोज ने कहा, यूक्रेन संघर्ष का असर पूरे वैश्विक दक्षिण पर पड़ा है, जो बहुत ही दुखद है। इसलिए यह जरूरी है कि वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को सुना और समझा जाए और उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का पक्ष यूक्रेन संघर्ष में मानवता को प्राथमिकता देना है। उन्होंने कहा, हम यूक्रेन को मानवीय मदद पहुंचा रहे हैं, साथ ही हमारे कुछ पड़ोसी देशों को, जो कि संघर्ष से प्रभावित हुए हैं और उन्हें आर्थिक सहायता भी दे रहे हैं, हमें उनकी मुल्भुत ज़रूरतें, जैसे कि ख़ाना, ईंधन, खाद की कीमतों पर भी ख़्याल रखना होगा, जो संघर्ष के कारण महंगी हो गई हैं।

रूचिरा कंबोज ने कहा, भारत ने ब्लैक सी ग्रेन प्रोजेक्ट का पूर्ण सहयोग किया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रयत्नों को सराहा है, जिनसे काला सागर के ज़रिए यूक्रेन से अनाज का निर्यात फिर से शुरू हुआ है, और हमें उम्मीद है कि इसमें आने वाली कोई भी बाधा जल्द ही हट जाएगी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 27 जुलाई को तुर्की के इस्तांबुल में हुए समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए कहा था कि काला सागर के माध्यम से यूक्रेनी अनाज की पहुंच में सुधार एवं संघर्ष-पीड़ित दुनिया में एक प्रेरक पहल है।

अमन ठाकुर – हिमाचल प्रदेश