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रूस की परमाणु एजेंसी को अमेरिकी मदद

वाशिंगटन: यूक्रेन और रूसी महासंघ के मध्य जारी युद्ध में एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, परंतु कोई भी पक्ष हार को स्वीकार नहीं करना चाहता है। यूक्रेन को कई देशों का समर्थन मिला है, जिसमें सबसे प्रमुख है संयुक्त राज्य अमेरिका। अमेरिका ने रूस को दंडित करने हेतु उससे जीवाश्म ईंधन की मांग को समाप्त कर दिया है। परन्तु, हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि अमेरिका प्रतिवर्ष एक अरब डॉलर के परमाणु ईंधन का सौदा रूस की परमाणु संस्था से करता है।

अमेरिका की परमाणु ऊर्जा की आवश्यकता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसके पीछे का कारण यह है कि अमेरिका में यूरेनियम का निर्माण कोई भी कंपनी नहीं करती है। इसलिए अमेरिका को रूस से परमाणु ईंधन मंगाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

अमेरिका ने यूरेनियम का उत्पादन और संवर्धन पूरी तरह से छोड़ दिया है। उसने कभी भी इसका महत्व नहीं समझा था। पर अब इसके कारण उसे रूस के साथ परमाणु ईंधन का सौदा करना पड़ता है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के पश्चात्, अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कई संकट से भरे कदम उठाए। अमेरिका ने सोचा कि वह रूस से किसी भी प्रकार का जीवाश्म ईंधन मंगाना बंद करेगा, और वह अभी भी इसी निर्णय पर टिका हुआ है। परन्तु, परमाणु ऊर्जा के मामले में, अमेरिका को मजबूर होकर ही समझौता करना पड़ा। कहा जा रहा है कि यदि यह सौदा न होता, तो परेशानी में स्वयं अमेरिका ही पड़ जाता।

विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिका और यूरोप को यूरेनियम का निर्माण करने में आत्मनिर्भर होने हेतु एक वर्ष का समय चाहिए होगा। इसके साथ ही, दुनिया के दर्जनों देश, जो अपनी परमाणु ऊर्जा कंपनियों को चलाने के लिए रूस से यूरेनियम मंगाते हैं, वह भी रूस पर निर्भर हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण रूस की परमाणु संस्था, जो यूक्रेन के जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र का नियंत्रण करती है।

रोसाटॉम की सहायक कंपनियां यूरेनियम के लिए पैसे पाती हैं। अमेरिका में जो यूरेनियम प्रयोग होता है, उसका लगभग एक तिहाई हिस्सा रूस से मंगाया जाता है, जो कि सबसे कम कीमत पर उत्पादन करता है। बाकी का अधिकांश हिस्सा यूरोप से मंगाया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में सिर्फ एक कंसोर्टियम है, जो ब्रिटेन, नीदरलैंड और जर्मनी की है, जो एक छोटा हिस्सा बनाती है। इस कंसोर्टियम की कंपनी, जो ओहियो प्लांट को चलाती है, कहती है कि रूस के साथ मुकाबले में उसे 10 वर्ष से आधिक का समय लगेगा।

अमन ठाकुर – हिमाचल प्रदेश