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यूक्रेनी बांध में मिले नाजी कंकाल

यूक्रेन के एक बड़े काखोवका बांध का जंग में नुकसान हुआ है। इसके साथ ही वहां के कर्मचारियों और लोगों ने मिट्टी से पुराने हथियार और खोपड़ियां निकाली हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ खोपड़ियां हिटलर की सेना के सैनिकों की मानी जा रही हैं।

बांध में पुराने हथियार और खोपड़ियां मिली हैं। ये हिटलर की सेना के सैनिक हैं जो रूस पर हमला करते वक्त मारे गए थे। रूस की एस-300 पुर्जा भी मिला है। बांध का पानी 4 मीटर कम हो गया है। इससे पहले 18 क्यूबिक किलोमीटर पानी रहता था।

यूक्रेन के बांध में नाजी सैनिकों की खोपड़ियां मिली हैं। इनमें से कुछ के सिर पर विश्व युद्ध के दौर के हेलमेट भी हैं। यूएनआईएएन ने इसका फुटेज दिखाया है।

इसमें विश्व युद्ध के हथियार और रॉकेट मिले हैं। रूस और यूक्रेन ने इसका जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाली है। अमेरिका की इंटेलिजेंस का कहना है कि बांध पर हमला हुआ था तब बांध रूस के नियंत्रण में था।

यूक्रेन के एक लंबे और पुराने बांध को जंग में तबाह किया गया है। इससे यूक्रेन को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने इस पर चिंता जताई है। इस बांध से क्रीमिया और एक न्यूक्लियर प्लांट को पानी मिलता था।

यूक्रेन और रूस के बीच जंग तेज हो गई है। यूक्रेन ने कुछ इलाकों को रूस से वापस लिया है। रूस ने यूक्रेन के प्रधानमंत्री के घर पर मिसाइलें मारी हैं। इसमें कई लोग मारे और घायल हुए हैं।

नाइपर नदी पर एक बांध को 1941 में रूस ने उड़ा दिया था। ये बांध जापोरिजिया में था। रूस का कहना था कि ये कदम नाजियों से बचने के लिए लिया गया था। सोवियत संघ के प्रवक्ता ने मीडिया को इसकी सूचना दी थी।

बांध तबाह कर सोवियत संघ ने जर्मन सेना को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया था। बांध को सोवियत संघ ने अपने पहले फाइव ईयर प्लान यानी पंच वर्षीय योजना के तहत बनाया था। इसे बनने में 8 साल लगे थे। इससे नाइपर नदी के दोनों तरफ पानी की आपूर्ती की जाती थी।

अमन ठाकुर – हिमाचल प्रदेश