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सेना का वायु सेना के साथ संयुक्त अभ्यास

नई दिल्ली: भारतीय थल सेना के साथ भारतीय वायु सेना ने सेंट्रल सेक्टर में एक संयुक्त अभ्यास का आयोजन किया। इसमें सेना के पैरा कमांडो ने आसमान से उतरने का कौशल दिखाया। साथ ही अपाचे हेलिकॉप्टर में रॉकेट लॉन्चर का प्रयोग करके अभ्यास किया गया।

सेना के फाइटर जेट, एलसीएस हेलिकॉप्टर, मिलिट्री एयरक्रॉफ्ट और यूएवी ने भी इस संयुक्त अभ्यास में हिस्सा लिया। इसमें जवानों ने किसी भी तरह की जंग की परिस्थिति से मुकाबला करने की क्षमता प्रदर्शित की।

अपाचे और एलसीएच लड़ाकू हेलिकॉप्टर भारतीय वायु सेना के बेड़े का हिस्सा हैं। अपाचे को अमेरिका में बनाया गया है और एलसीएच को भारत में। ये दोनों वायु सेना की प्रभावशालीता को बढ़ाते हैं। साथ ही एमआई-25 और एचएएल रुद्र जैसे हेलिकॉप्टर भी हैं। वायु सेना में मिग, सुखोई और राफेल जैसे फाइटर जेट भी शामिल हैं।

एलसीएच का निर्माण कार्य हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को सरकार ने वर्ष 2006 में सौंपा था। एलसीएच के प्रथम प्रोटोटाइप का पहला ग्राउंड टेस्ट वर्ष 2010 में फरवरी में हुआ था। कुछ महीने के पश्चात् पहला फ्लाइट टेस्ट भी हो गया था। 4 एलएलएच प्रचंड को 3 अक्टूबर 2022 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोधपुर में वायु सेना को सौंपे थे।

एएच 64ई अपाचे विश्व के सबसे ज़्यादा उन्नत मल्टी काम्बैट हेलिकाप्टर हैं। इनमें उच्च गुणवत्ता वाला रात्रि दृष्टि प्रणाली है। जिससे अंधेरे में भी दुश्मन को पहचाना जा सकेगा। यह मिसाइलों से सुसज्जित हैं और एक मिनट में 128 लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। यह बहुत सारे हथियारों को ले कर जा सकता है। 293 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से उड़ सकता है।

हेलिकॉप्टर में 16 एंटी टैंक एजीएम-114 हेलफायर और स्ट्रिंगर मिसाइल होती हैं। हेलफायर मिसाइल से कोई भी संरक्षित वाहन जैसे टैंक, तोप, बीएमपी वाहनों को फाड़ सकती है। स्ट्रिंगर मिसाइल से कोई भी हवाई खतरा निरस्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इसमें हाइड्रा-70 अनिर्देशित मिसाइल भी होती हैं जो जमीनी लक्ष्य को नष्ट कर सकती हैं।

अमन ठाकुर – हिमाचल प्रदेश