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देश मे बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिम्मेदार कौन?

यूं तो जब भी किसी इंसान की तबियत ज्यादा बिगड़ जाती है तो उसे अस्पताल में दाखिल करने के लिए कहा जाता है , इस उम्मीद के साथ कि वहां बेहतर इलाज मिल पाएगा । लेकिन अब हालत बिल्कुल बदल गए हैं । अस्पतालों की जो तस्वीरें और बदहाली सामने आ रही है उससे तो यही लगता है कि अब अस्पताल जाना यानी मौत के मुंह में जाना । हमने अस्पताल की लापरवाही की बहुत से किस्से देखे लेकिन हमेशा चुप्पी इसलिए साध ली गई क्योंकि डॉक्टर को भगवान का रूप कहा जाता है । खैर इस कलयुग में शायद अब ये हज़म नहीं होगी । हमारे देश में स्वास्थ्य, शिक्षा को पैसे कमाने का जरिया बना लिया गया है इसलिए ना हर गुरु को भगवान का दर्जा दो और न हर डॉक्टर को । बिहार के भागलपुर में एक पत्नी ने अपने पति को बचाने के लिए क्या क्या सहा पर अस्पताल की लापरवाहियों ने उसे मार दिया । दिल्ली में बड़े बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन घंटों बंद कर दी जाती है , दम तोड़ रहे मरीजों के बारे में किसी को कोई इल्म नहीं होता , गुरुग्राम में अस्पताल में मरीजों की मौत के बाद पूरा स्टाफ भाग जाता है तीमारदार रोते बिलखते रह जाते हैं , मेरठ में मेडिकल अस्पताल में एक शव को ले जाने को लेकर कर्मचारियों और अस्पताल के स्टाफ में ही मारपीट शुरू हो जाती है । एक कामयाब होनहार युटूबर मरने से पहले वीडियो बनाता है और दिखाता है कि उसे सिर्फ ऑक्सीजन का मास्क लगा दिया गया और डॉक्टर ने ऑक्सीजन लगाई ही नही । अरे इतने किस्से हैं की गिनती नहीं हो पाएगी । हां जनाब होते हैं डॉक्टर भगवान का रूप लेकिन आज कैसे हैवान बन बैठे हैं ? ये सवाल है उन डॉक्टर्स से जो इस सब में हिस्सदार हैं … अब सवाल है सरकार से कि आखिर स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी किसकी है ? आखिर इतने बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी क्यों है ? गांवों में अस्पतालों के नाम पर बिना जांच , बिना मशीनों वाला स्वास्थ्य केंद्र क्यों हैं ? और जब मरीजों की संख्या बढ़ गई तो डॉक्टर की कमी क्यों ? अस्पतालों पर तो जो आरोप है सो हैं लेकिन अस्पताल के बहाने सरकार अपना पल्ला झाड़ चुकी है । और अस्पताल और सरकार पर ठीकरा फोड़ कर हम भी अपना पल्ला झाड़ चुके हैं क्योंकि हमने कभी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वोट दिया ही नहीं । ये हालात आज किसी एक की नही बल्कि सबकी भागीदारी से ऐसे हैं । और अगर अब भी हम न समझे तो महामारी की तीसरी लहर अब कुछ तबाह कर ले जाएगी ।

मेघना सचदेवा