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रूस ने किया विक्ट्री-डे परेड का आयोजन, 10 हजार सैनिक हुए सम्मलित

मॉस्को: रुसी महासंघ ने मंगलवार को विक्ट्री-डे परेड का आयोजन करवाया। 9 मई के दिन ही स्टालिन के सोवियत संघ ने दूसरे विश्व युद्ध में हिटलर की नाजी जर्मनी को युद्ध में हराया था। रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने आवास क्रेमलिन से रेड स्क्वायर पहुंचे जहां पर विक्ट्री-डे परेड का आयोजन करवाया गया। अपने 10 मिनट के भाषण के समय राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि नाजियों की पराजय के 78 वर्ष पश्चात् एक बार दोबारा से रूस और पूरे संसार पर खतरा मंडरा रहा है। रूस के विरुद्ध असली जंग की शुरुआत हो चुकी है।

राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के विरुद्ध चल रहे युद्ध की तुलना नाजी जर्मनी के संग हुए युद्ध के साथ की। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के नेता दुनिया के लिए एक नाजी हैं। यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक समुदाय को एक ब्रेकिंग पॉइंट पर लाकर खड़ा कर दिया है। रूस भविष्य में शांति कायम करना चाहता है, परंतु पश्चिमी देश यह नहीं चाहते। वो निरंतर लोगों में नफरत और रशोफोबिया (रूस के विरुद्ध नफरत और भय) की भावना को बढ़ा रहे हैं। वह केवल हमारे देश को तबाह करना चाहते हैं। युक्रेन के लोग पश्चिमी देशों के बुरे इरादों के गुलाम बन गए हैं।

परेड में 6 देशों के नेता भी हुए सम्मलित

विक्ट्री डे के जश्न में वह 6 देश शामिल हुए जो कभी सोवियत संघ का हिस्सा थे। कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, आर्मेनिया, उजबेकिस्तान, ताजिकिस्तान और बेलारूस के नेता पुतिन के साथ देखे गए। सभी नेताओं ने रेड स्क्वायर पर दूसरे विश्व युद्ध के वक़्त मारे गए रूस के सेनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस दौरान 125 सैन्य वाहनों और 10 हजार रूसी सैनिकों ने परेड निकाली। इसमें रूस की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल व एस-400 मिसाइल प्रणाली भी सम्मलित थी। हालांकि, कुछ दिन पूर्व ही क्रेमलिन पर हुए ड्रोन हमले के मद्देनज़र इस वर्ष की परेड में कोई सैन्य फ्लाईपास्ट नहीं निकला गया।

राष्ट्रपति पुतिन बोले- सैनिकों पर ठहरा है रूस का भविष्य

भाषण को आरंभ करते हुए व्लादिमीर पुतिन ने समस्त साथी देशों का विक्ट्री-डे परेड में सम्मलित होने पर उनका शुक्रिया अदा किया। इसके पश्चात् उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए रुसी सैनिकों की याद में एक मिनट का मौन धारण करने को कहा। राष्ट्रपति पुतिन बोले कि देश के लिए उसके सैनिक युद्ध का बेहद ज़रूरी हिस्सा हैं, मुझे उन पर गर्व है। रूस का भविष्य इन्हीं सैनिकों पर टिका हुआ है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की बोले- नाजी जर्मनी के जैसे रूस भी हारेगा

इससे पूर्व यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रुसी महासंघ की तुलना नाजी जर्मनी से की। यूरोप डे के उपलक्ष्य पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि जिस प्रकार दूसरे विश्व युद्ध में नाजियों को हार का सामना करना पड़ा था ठीक उसी प्रकार इस युद्ध में रूस को हार का मुंह देखना पड़ेगा। हमने जैसे उस वक़्त साथ मिलकर बुराई का खात्मा किया था अब भी वैसा ही करेंगे। रुस नई बुराइयों को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन हम नाजियों के जैसे उनका भी खात्मा करेंगे।

9 मई 1945 को सोवियत संघ ने किया था नाजी जर्मनी को पराजित

सोवियत समाजवादी गणतंत्रों का संघ (सोवियत संघ) ने 9 मई 1945 को प्रथम विक्ट्री-डे का जश्न मनाया था। उस वक़्त हिटलर की नाजी जर्मनी की सेना ने सोवियत संघ की सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। वर्ष 1945 में दूसरे विश्व युद्ध समाप्त होने के पश्चात् साथी देशों ने 8 मई को जीत का ऐलान करते हुए इसे यूरोप डे की संज्ञा दी थी। हालांकि, इस बीच सोवियत संघ यह प्रतिक्षा कर रहा था कि नाजी जर्मनी आधिकारिक तौर पर अपनी पराजय स्वीकार कर ले। जब तक नाजियों ने कागजात पर दस्तखत किए तब तक मध्यरात्रि हो चुकी थी, इसलिए रूस 9 मई को विजय दिवस (विक्ट्री-डे) मनाता है।

रूसी महासंघ का विक्ट्री-डे उसके सैनिकों के बलिदान के प्रति सम्मान है जो दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उस युद्ध में सोवियत संघ के 80 लाख सैनिक मारे गए थे। रूस में इसे ग्रेट पैट्रियॉटिक वॉर से संबोधित किया जाता है।

अमन ठाकुर- हिमाचल प्रदेश