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अंधेरे में चमकने वाला अनोखा मशरूम जिसे एक रोशनी के स्रोत के रूप में किया जाता है उपयोग

प्रकृति हमेशा ही अपने आप में एक नया आश्चर्य है। यहां हमे रोज कुछ नया देखने सुनने को मिलता है, तो आज हम आपको मशरूम की एक अनोखी किस्म के बारे में बताने जा रहे हैं जो मेघालय के जंगलों में खोजी गई है। मशरूम के ये नए वेरिएंट रात में चमकते हैं!

मावलिनॉन्ग के पूर्वी खासी हिल्स जिले में एक जलधारा के पास मशरूम की 600 से अधिक किस्में पाई गईं। शोध शोध में पता चला यह जैव-रासायनिक मशरूम प्रजाति है। जिसे स्थानीय लोग इलेक्ट्रिक मशरूम कहना पसंद करते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम Roridomyces phyllostachydis है।

दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय लोग रात में जंगल में नेविगेट करने के लिए प्राकृतिक मशालों के रूप में इन चमकते मशरूम का उपयोग करते हैं। Bioluminescent कवक मुख्य रूप से दक्षिण पूर्व एशिया, जापान, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के कुछ क्षेत्रों में बढ़ता है।

चमकती हुई डंठल के पीछे के तंत्र को स्पष्ट करते हुए बताया गया कि “जब ऑक्सीजन की उपस्थिति में एंजाइम लूसिफ़ेरस द्वारा उत्प्रेरित किया जाता है, तो हरे रंग की रोशनी निकलती है।”

माइकोलॉजिस्ट के अनुसार, भारत में वास्तव में रिपोर्ट की तुलना में अधिक bioluminescent मशरूम हैं। मेघालय के अलावा, वे महाराष्ट्र, गोवा और केरल राज्यों में भी पाए जाते हैं, लेकिन बहुत से लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं। पश्चिमी और पूर्वी घाटों में उगने वालों की वैज्ञानिक रूप से जांच की जानी बाकी है। इसके अलावा, यह जमीन पर पाए जाने वाले इलेक्ट्रिक मशरूम का एक दुर्लभ मामला है, क्योंकि आमतौर पर समुद्र में बायोलुमिनसेंट कवक उगते हैं ।

  • शिवानी गुप्ता