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एम्बुलेंस और ऑक्सीजन की नेताओं द्वारा जमाखोरी, जनता के साथ छल

हमारे देश में सांसद विधायक या नेता की कोई कमी नहीं है । जब किसी पार्टी को कमी लगती है , उसी वक्त मुंह मांगी कीमत के बदले मिल जाते हैं । राजस्थान देख लो , महाराष्ट्र देख लो , बंगाल देख लो , बस नजर घुमाओ ये व्यापार तो हर जगह फैला हुआ है नेता खरीदो जितने चाहे खरीदो …बस डिमांड बताओ सप्लाई ही सप्लाई है । सबसे ज्यादा ऐश तो इन्ही बिकाऊ नेताओं की है। सैलरी मिलती है , इज्जत लोगों को ना चाहकर भी इन्हे देनी पड़ती है , नेतागिरी और रोब झाड़ने का मौका ये छोड़ते नहीं, और अब तो इन लोगों ने आम आदमी से खिलवाड़ का पूरा बिजनेस ही तैयार कर लिया है । पूरा देश त्राहिमाम कर रहा है , और यहां कोई सांसद दर्जनों एंबुलेंस छुपाए बैठे हैं , और विधायक साहब ऑक्सीजन सिलेंडर की बारात जमा किए बैठे हैं । मतलब खुद तो बिकाऊ हैं ही लेकिन और क्या क्या बेचने की प्लानिंग है कुछ कह नहीं सकते । कालाबाजारी और जमाखोरी को खत्म करने का नारा देते देते यहां तो ये खुद की संगत में खुद ही ये दोनो काम करने बैठ गए। एक एक वोट के लिए ये लोग जब सड़को पर निकलते हैं तो मतदाताओं का हुजूम होता है साथ जो वोट देते हैं कि हमे भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी । खैर मिलता है विश्वास के बदले विश्वाघात। पैसा कमाने की चाह राजनीति में कोई नई नहीं है पर पैसे के लिए यहां तक गिर जाना की जनता की जान पर बन आए बस इनके बैंक बैलेंस में कमी न आए…ये घोर पाप है। ये समाज के वो गिद्ध हैं जो अपनों को ही नोच कर खा जाए और फिर उसी मौत पर आंसू बहा कर सहानभूति कमाए। एक एक ऑक्सीजन का सिलेंडर कैसे इंसान की जिदंगी की डोर को बांधे रखने के लिए जरूरी हो गया है सबके सामने है । एंबुलेंस ना मिलने से कितनो ने अपनों को इलाज से पहले ही खो दिया , उन्हें अंदर तक ये बात खा जाती है की काश वो अस्पताल पहुंच पाते तो उनके अपने उनके साथ होते। पर जिस हिसाब से ऑक्सीजन की और एम्बुलेंस की जमाखोरी के मामले सामने आए हैं….. ये सभी जाने जो रही हैं ये हत्या जैसा प्रतीत होता हो रहा है । ये वही सांसद विधायक है जिन्होंने शपथ ली होती है हमारे हित की , पर जनाब पहले इन नेताओं का हित तो हो जाए उनके खजाने तो भर जाएं । वरना ना अगले चुनाव में किसी को खरीद पाएंगे और ना खुद बिक पाएंगे !

मेघना सचदेवा (स्टेट हेड दिल्ली)