• Thu. Jul 18th, 2024

आज औपचारिक तौर से प्रिंस चार्ल्स बनेंगे यूके के किंग चार्ल्स तृतीय

लंदन: यूनाइटेस किंगडम ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दन आयरलैंड के सम्राट किंग चार्ल्स तृतीय की शनिवार को ताजपोशी की जाएगी। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की मृत्यु के पश्चात् ही राजा चार्ल्स को यूके के सम्राट के रूप में स्वीकार कर लिया गया था, परन्तु आज के समारोह में औपचरिक तौर से ताज को पहनाने की परंपरा को निभाया जाएगा। आपको बता दें कि महारानी एलिजाबेथ की ताजपोशी 2 जून 1953 को हुई थी। इस समारोह में लगभग सौ देशों के राष्ट्राध्यक्ष और राजपरिवार एक हजार वर्ष पुरानी परंपरा के साक्षी बनेंगे।

ताजपोशी में सम्मलित होंगे सौ से भी ज़्यादा देश

यूनाइटेड किंगडम 70 वर्षों के पश्चात् एक बार फ़िर राजतिलक का गवाह बनने जा रहा है। वैसे तो महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की मृत्यु के पश्चात् ही प्रिंस चार्ल्स को यूके का सम्राट घोषित कर दिया गया था। परंतु अब शनिवार को औपचारिक तौर से उनकी ताजपोशी की शाही परंपरा को निभाया जाएगा। इस समारोह में लगभग सौ देशों के राष्ट्राध्यक्ष व राजपरिवार एक हज़ार वर्ष पुरानी परंपरा के साक्षी बनेंगे। शाही तौर वाला यह ताजपोशी समारोह तीन दिन तक चलेगा। इसके साथ ही यूके के सम्राट इंग्लैंड के गिरजाघर (चर्च ऑफ इंग्लैंड) के प्रधान बन जाते हैं और उन्हें विशेष अधिकार मिल जाते हैं। हालांकि, यह परंपरा ज़रूरी नहीं है। आपको बता दें कि किंग एडवर्ड सप्तम ने बिना ताजपोशी के ही राजगद्दी को संभाला था।

इस बार राजमुकुट में नहीं होगा कोहिनूर हीरा

इस प्रकार की अटकलें लगाई जा रही थीं कि महारानी कैमिला किंग चार्ल्स तृतीय की दादी यानि क्वीन मदर का ताज पहन सकती हैं, जिसमें कोहिनूर का हीरा जड़ा हो। परन्तु बकिंघम राजमहल ने 14 फरवरी को यह स्पष्ट कर दिया था कि इस अवसर हेतु महारानी मैरी के ताज को बदला गया है। आपको बता दें कि इस समारोह में 2200 से भी ज़्यादा शाही अतिथि सम्मलित होंगे, जिसमें जापान, थाईलैंड, भूटान समेत दुनिया के कई देशों के शाही परिवारों के सदस्य व राष्ट्राध्यक्ष आएंगे।

इसलिए ज़रूरी है यह ताजपोशी 

पिछले वर्ष 8 सितंबर को यूके की महारानी एलिजाबेथ तृतीय की मृत्यु के दो दिन पश्चात् ही राजकुमार चार्ल्स को यूनाइटेड किंगडम का सम्राट घोषित कर दिया था। यह परंपरा इस मायने में भी बेहद ज़रूरी है कि महाराज चार्ल्स ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, कनाडा समेत राष्ट्रमण्डल प्रजाभूमि वाले 15 देशों के भी सम्राट बन जाएंगे।

चार टन की बग्घी में सवार होंगे महाराज चार्ल्स तृतीय

महाराज चार्ल्स और महारानी कैमिला घोड़े द्वारा चलने वाली बग्घी में बैठकर वेस्टमिंस्टर एबे पहुंचेगें। इस बग्घी में बिजली द्वारा संचालित खिड़कियां एवं एसी की सुविधा मौजूद है। वह हीरक जयंती (डाइमंड जुबली) स्टेट कोच में सवार होकर जाएंगे। इस बग्घी का सर्वप्रथम प्रयोग आज से नौ वर्ष पूर्व 2014 में किया गया था। राज्यभिषेक के पश्चात् महाराज चार्ल्स और महारानी कमिला बकिंघम राजमहल में लौटेंगे, जो कि वर्ष 1830 के बाद से प्रत्येक ताजपोशी में प्रयोग होती रही है। चार टन वजनी यह बग्घी वर्ष 1767 से शाही खानदान के पास है। वर्ष 1953 में महारानी एलिज़ाबेथ की ताजपोशी के जैसे इस बार भी आयोजन का सीधा प्रसारण किया जाएगा। साल 1066 से ही ताजपोशी समारोह का आयोजन वेस्टमिंस्टर एबे में ही किया जा रहा है।

700 वर्ष पुरानी राजगद्दी, पवित्र जल से राज्यभिषेक, थामेंगे राजदंड

  • शाही गिरजाघर वेस्टमिंस्टर एबे में महाराज चार्ल्स 700 वर्ष पुरानी कुर्सी के बगल में खड़े होंगे। केंटरबरी के आर्कबिशप ‘भगवान सम्राट की रक्षा करें’ का उध्दोष करेंगे।

  • चार्ल्स कानून व चर्च ऑफ इंग्लैंड को कायम रखने की शपथ लेंगे। उसके पश्चात् कुर्सी पर विराजमान होंगे। आर्कबिशप उनके हाथों तथा सिर पर पवित्र तेल से राज्यभिषेक करेंगे।

  • सम्राट को धार्मिक व नैतिक अधिकारों का प्रतीक एक शाही गोला और राजदान प्रदान किया जाएगा। आख़िर में उनके सिर पर सेंट एडवर्ड का राजमुकुट रखा जाएगा। यही प्रकिया महारानी कैमिला की ताजपोशी में भी अपनाई जाएगी।
  • इसके पश्चात् सम्राट ताजपोशी की कुर्सी से उठकर सिंहासन पर विराजमान होंगे।

समारोह में पहली बार शामिल होंगे बौद्ध और हिंदू धर्मगुरु 

ब्रिटिन की राजशाही के इतिहास में पहली बार किसी उत्तराधिकारी को ताजपोशी के लिए इतनी लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ी है। यह प्रथम अवसर होगा, जब ताजपोशी के अनुष्ठान में बौद्ध, हिंदू, यहूदी, मुस्लिम और सिख धर्मगुरु भी सम्मलित होंगे।

उपराष्ट्रपति धनखड़ कर रहे भारत का प्रतिनिधित्व

भारत गणराज्य की ओर से आधिकारिक प्रतिनिधि के तौर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ताजपोशी समारोह में मौजूद रहेंगे। वह उनकी धर्मपत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ शुक्रवार को यूके की राजधानी लंदन पहुंचे। उपराष्ट्रपति के कार्यालय ने बताया कि लंदन में उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया।

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर और मुंबई के दो डिब्बावालों को ताजपोशी समारोह में आमंत्रित किया गया है। भारतीय मूल की ब्रिटिश शेफ मंजू मल्ही को भी आमंत्रित किया गया है जो उन लोगों में मशहूर हैं, जिन्हें ब्रिटिश साम्राज्य पदक से सम्मानित किया गया है।

विशेष होगी सजावट

ताजपोशी करने हेतु आयोजन स्थान को विशेष प्रकार के पुष्पों से सजाया गया है। इसमें मुख्य रुप से एंकिलेजिया पुष्प का प्रयोग किया गया है, जिसे पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन नहीं होंगे सम्मलित

राज्यभिषेक समारोह में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के सम्मालित न होने का रिवाज इस बार भी बरकरार है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ताजपोशी समारोह में नहीं आएंगे। हालांकि, उनकी पत्नी जिल बाइडेन मौजूद रहेंगी।

मेगन दक्षिण कैलिफोर्निया में

महाराज चार्ल्स के छोटे बेटे राजकुमार हैरी की पत्नी मेगन अपने दोनों बच्चों के साथ दक्षिण कैलिफोर्निया में हैं और शाही ताजपोशी समारोह का भाग नहीं बनेंगी।

अपनी धर्मपत्नी के संग आएंगे प्रधानमंत्री सुनक

यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक अपनी धर्मपत्नी अक्षता मूर्ति के संग समारोह में सम्मलित होंगे। साथ ही हाउस ऑफ लार्ड्स के सदस्य भी होंगे।

समारोह के बीच शाही फिज़ूलखर्ची का भी हो रहा विरोध

ताजपोशी पर 100 मिलियन पाउंड स्टर्लिंग यानि 1029 करोड़ भारतीय रूपये खर्च आने का अनुमान लगाया जा रहा है। तक़रीबन समस्त देश में जश्न का वातावरण है। परंतु कुछ लोग इस आयोजन के विरुद्ध भी हैं। दरअसल इसका सारा खर्च राजपरिवार का नहीं, अपितु यूके की सरकार को कर (टैक्स) देने वाली जनता के धन से हो रहा है। ऐसे में रिवाज के नाम पर शाही समारोह पर हो रही फिज़ूलखर्ची के खिलाफ़ प्रदर्शन भी देखने को मिल रहा है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि इसके बाद देश से शाही परिवार जैसा पद खत्म हो जाए। वे ताजपोशी के खिलाफ़ में ‘नॉट माई किंग’ यानि यह मेरे राजा नहीं हैं अभियान चला रहे हैं। सोशल मीडिया के ट्विटर पर भी यह ट्रेंड कर रहा है।

सर्वे में हुआ चौंकाने वाला दावा- 50 प्रतिशत लोग विरोध में

शाही ताजपोशी समारोह पर हो रहे खर्च को लेकर कराए गए एक सर्वे के मुताबिक यूके के 50 प्रतिशत लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यहां के लोग महंगाई से परेशान हो रखे हैं। लोगों के पास घर में आने वाली बिजली और पानी का बिल के भुगतान के लिए भी पैसे मौजूद नहीं हैं। बड़े से बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर रिक्त पड़े हैं। जनता का हाल बेहाल है। ऐसी स्थिति में शाही समारोह में इतना अधिक खर्चा करना करदाताओं पर जु़ल्म है।

अमन ठाकुर – हिमाचल प्रदेश