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जानें तीसरे कैबिनेट विस्तार के जरिए सीएम योगी ने क्या-क्या साध लिया।

               उत्तर प्रदेश सरकार का तीसरा मंत्रिमंडल विस्तार आखिरकार विधानसभा चुनाव से चार महीने पहले हो ही गया। सत्ता में दोबारा वापसी के प्रयासों में जुटी भाजपा सरकार और संगठन ने नए मंत्रिमंडल में शामिल सात मंत्रियों व चार एमएलसी के मनोनयन  के जरिये न केवल जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है।वहीं वर्ष 2019 में सुभासपा के खाए धोखे या यूं कहें सहयोगी दलों की तुलना में अपनी पार्टी के चेहरों को मंत्रिमंडल में लेकर संदेश देने की कोशिश की गई है कि पार्टी के लिए  अपना संगठन और विधायक ही सर्वोपरि हैं।वहीं जितिन प्रसाद मंत्रिमंडल में ब्राह्मण चेहरे के रूप में शामिल हुए हैं। गौरतलब है कि पार्टी ने अपने गैर यादव-गैर जाटव समीकरण पर कायम रहते हुए। ओबीसी के साथ ही दलित जातियों को भी संदेश देने की कोशिश की है। वहीं बसपा के समीकरण की गति को मध्यम करने के मकसद से अवध क्षेत्र के बलरामपुर से पल्टू राम और मेरठ के हस्तिनापुर से दिनेश खटीक को राज्यमंत्री बनाया गया है। पार्टी इसके जरिये एक तीर से दो निशाने लगाना चाहती है। पश्चिम में वह चंद्रशेखर की आजाद पार्टी की रफ्तार थामने की कोशिश में है तो अवध में देवीपाटन से लेकर अयोध्या-अंबेडकरनगर में बसपा से जुड़े दलितों को संदेश देने की कोशिश है।यही नहीं पार्टी ने ऐसे चहरों को महत्व दिया है जो पहली बार विधानसभा पहुंचे। इनमें मुख्य रूप से डा. संगीता बलवंत, संजय गौड़, पल्टू राम और दिनेश खटीक पहली बार विधानसभा पहुंचे थे।


सतीश कुमार