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डेढ़ साल से बंद पड़े दार्जिलिंग रेल की सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं, पर पर्यटकों की कमी से हुआ फीका

पर्यटकों में लोकप्रिय हिमालयन रेल के इस नैरो गेज लाइन पर निजीकरण की तलवार लटक रही है। भारत सरकार ने छह लाख करोड़ की रकम जुटाने के लिए जिन ट्रेनों को निजी क्षेत्र को लीज पर देने का फैसला किया है उनमें यूनेस्को की हेरिटेज सूची में शामिल दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे डीएचआर की ट्वाय ट्रेन भी शामिल है।इससे पर्यटक और इस उद्योग से जुड़े लोग आशंकित हैं।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेलवे के निजीकरण के लिए 400 रेलवे स्टेशनों, 90 यात्री ट्रेनों, 15 रेलवे स्टेडियम और कई रेलवे कॉलोनियों की पहचान करने का एलान किया है. इसके साथ ही सरकार ने कोंकण और कुछ अन्य पहाड़ी इलाकों की रेलों का निजीकरण करने की भी बात कही है। एहतियात के तौर पर सरकार इस मामले में निजीकरण शब्द का इस्तेमाल करने की बजाय इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप कहती है. वित्त मंत्री के मुताबिक, रेलवे की खाली पड़ी जमीनों, कॉलोनियों, स्टेडियम और ट्रेनों को निजी हाथों में विकास के लिए दिया जाएगा।

सतीश कुमार (ऑपेरशन हेड, साउथ इंडिया)