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भारत में छठ पूजा का महत्व

Oct 17, 2022 ,

भारत एक विशाल देश है जिसमें विभिन्न प्रकार के धर्म, जाति एवं समुदाय के लोग निवास करते हैं । जिनके अलग-अलग त्योहार , रीति रिवाज एवं परंपराएं होती हैं इन्हीं त्योहारों में से एक है छठ पूजा छठ पूजा एक ऐसा त्यौहार है जो हिंदू धर्म में मनाया जाता है। यह प्रत्येक वर्ष दिवाली के 6 दिन बाद आता है । छठ पूजा में सूर्य देवता के साथ छठी मैया की भी पूजा की जाती है कहा जाता है कि छठ पूजा बहुत ही कठिन त्यौहार होता है जिसमें माताएं पुत्रप्राप्ति एवम संतान के सुत्यौहार।। के लिए 36 घंटे का निर्जल उपवास रखती हैं । छठ पूजा का त्यौहार भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
कब है छठ पूजा
हिंदू कैलेंडर के अनुसार छठ पूजा इस वर्ष 30 अक्टूबर 2022 को मनाई जाएगी 30 अक्टूबर रविवार का दिन है कार्तिक माह के शुक्ल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा मनाते हैं। यह पर्व पूरे चार दिनों तक बेहद धूमधाम से लोग मनाते हैं।
पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है. उसके बाद खरना होता है और फिर तीसरे दिन शाम को सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और फिर आखिरी दिन सुबह को लोग सूर्य को अर्घ्य देकर इस पर्व का समापन करते हैं. इस त्योहार पर नदी, तालाब, घाट पर गजब की रौनक देखने को मिलती है।


क्या है नहाय खाय और खरना
28 अक्टूबर को नहाय खाय है और 29 अक्टूबर को खरना है। छठ पूजा का शाम का अर्घ्य 30 अक्टूबर को दिया जाएगा और समापन यानी पारण 31 अक्टूबर को है. इस दिन सुबह के समय सूर्य देवता को अर्घ्य दिया जाता है और पूजा का समापन होता है। नहाय खाय के दिन घर की साफ-सफाई की जाती है. चूल्हा-चौका, बर्तन सब अच्छी तरह से साफ किया जाता है. तरह-तरह के सात्विक भोजन बनाए जाते हैं. सुबह ही व्रत रखने वाले लोग स्नान आदि करते हैं और नए वस्त्र पहनते हैं। उसके बाद छठ का प्रसाद तैयार किया जाता है. दूसरे दिन यानी खरना में व्रती सुबह स्नान करके पूरे दिन का व्रत रखते हैं. प्रसाद बनाते हैं. रात में पूजा करने के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं. इस दिन गुड़ की खीर, रोटी बनाई जाती है।

खीर के अलावा, पूड़ी, ठेकुआ, कई तरह के फल, सब्जियां, ईंख आदि भी प्रसाद में शामिल होते हैं. खरना के दिन प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही व्रत की शुरुआत होती है। व्रती इसके बाद छठ पूजा के समाप्त होने तक अन्न और जल ग्रहण नहीं करते हैं. इस पूजा में हर सामग्री शुद्ध, साफ, नया होना चाहिए. यहां तक की मिट्टी का चूल्हा या गैस भी नया हो. तीसरे और चौथे दिन छठ व्रती डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस महापर्व का समापन करते हैं।
छठ पूजा का महत्व
मान्यता है कि जो कोई छठ पूजा को पूरी श्रद्धा भाव से करता है, व्रत रखता है, उसके घर सुख-समृद्धि आती है. संतान की उम्र लंबी होती है. आप जितना इस पर्व के दौरान नियमों, साफ-सफाई का पालन करते हैं, छठी माई उतनी ही ज्यादा प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद देती हैं. कहा जाता है कि पूजा की सामग्री, प्रसाद आदि को भूलकर भी जूठा नहीं करना चाहिए, इससे छठी माई नाराज हो जाती हैं।

कोमल गुर्जर, मेरठ