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अयोध्या राम मंदिर जमीन खरीद मामलें में पक्ष-विपक्ष में छिड़ा विवाद, भ्रष्टाचार के लगे आरोप

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पर चुनाव के पहले अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर विवादों के घेरे में आ गया है। समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि राम मंदिर के जमीन खरीद के नाम पर करोड़ो रुपयों का घोटाला हुआ है। रविवार को जैसे यह मामला सामना आया वैसे ही उत्तर प्रदेश में एक बार फिर सियासत गर्म हो गई।
आम आदमी पार्टी ने मंदिर के उस ट्रस्ट पर घोटाले के आरोप लगाए हैं जिन्हें मंदिर बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। अयोध्या मंदिर निर्माण के भूमि पूजन में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल शिरकत की थी। भूमि पूजन के बाद पूरे देश के लोगों को मंदिर से जल्द से जल्द निर्माण का इंतजार था, पर अब मंदिर बनाने वाले ट्रस्ट पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं।
आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि जो जमीन की कीमत दो करोड़ रुपये थी उसे ट्रस्ट ने 18 करोड़ रुपये में खरीदी है। आरोप में बताया गया कि पहले जमीन की कीमत 2 करोड़ थी लेकिन महज 10 मिनट में डील पक्की होने के बाद उसकी कीमत साढ़े 18 करोड़ हो गई। इसका मतलब साफ है कि महज दस मिनट 16 करोड़ रुपये जमीन की रेट बढ़ गई, यानी हर सेंकड में साढ़े पांच लाख रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है।
इस वर्ष 18 मार्च को ही दोनों जमीन की डील हुई है और दोनों डीलों में महज दस मिनट का फर्क था। एक दिलचस्प बात यह भी है की दोनों के गवाह भी कॉमन हैं। गवाह का नाम अनिल मिश्रा है जो रामजन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य भी हैं। वहीं दूसरे गवाह का नाम ऋषिकेश उपाध्याय है जो अयोध्या के मेयर भी हैं। आम आदमी पार्टी द्वारा लगाए गए सारे आरोप को मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने गलत बताया है।
आपको बतादें की आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने जमीन खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए है और सीबीआई जांच की मांग भी की है। राम मंदिर निर्माण में हुए इस विवाद के बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने इसे राजनीतिक आरोप बताया है।
सौरव कुमार