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1971 की जंग में दिया पाकिस्तानी सैनिक ने दिया,भारत का साथ मिला पदमश्री अवार्ड।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कई अहम हस्तियों को विशेष सम्मानों से सम्मानित किया। इन्हीं शख्सियतों में से एक थे लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर। यूं तो लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर कभी पाकिस्तानी सैनिक हुआ करते थे लेकिन आज जब उन्हें पद्म श्री से नवाजा गया तब इस नाम ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर वो नाम है जिससे आज पाकिस्तान बेपनाह नफरत करता है। साल 1971 के मार्च के महीने की है। पाकिस्तानी आर्मी का एक जवान जिसकी पोस्टिंग सियालकोट सेक्टर में थी वो अचानक बॉर्डर पार कर भारत में घुस गया। उसके जूते में कुछ कागज और नक्शे रखे हुए थे। उस वक्त बॉर्डर पर तैनात भारतीय सैनिकों ने उसे पाकिस्तानी जासूस समझा और तुरंत पकड़ लिया। जल्दी ही इस शख्स को पठानकोट ले जाया गया और यहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उससे कई सवाल-जवाब किये।इस घटना के बाद पाकिस्तानी सैनिक को दिल्ली ले जाया गया और उन्हें वहां एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया। यहां उन्होंने कई महीने गुजारे और मुक्ति वाहिनी में गुरिल्ला लड़ाई के गुर सीखाए ताकि पाकिस्तानी सैनिकों को धूल चटा सकें।पाकिस्तान ने लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर को मौत की सजा सुनाई थी और पिछले 50 साल से पाकिस्तान इस सजा को मुकम्मल अंजाम तक पहुंचाने के इंतजार में है। बांग्लादेश की आजादी से पहले कर्नल जहीर पाकिस्तानी सेना के बड़े अधिकारी थे, पाकिस्तान की गलत हरकतों की वजह से उन्होंने भारतीय सेना को कई गोपनीय दस्तावेज भी सौंपे थे, जिसकी वजह से पाकिस्तानी सैनिकों की उस समय के पूर्वी पाकिस्तान यानी बांग्लादेश में हालत खराब हो गई।

सतीश कुमार