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चीन का सैन्य जमावड़ा और, बड़े पैमाने पर तैनाती चिंता का विषय।

एम नरवणे ने शनिवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीन की ओर से सैन्य जमावड़ा और व्यापक पैमाने पर तैनाती को बनाए रखने के लिए नये बुनियादी ढांचे का विकास चिंता का विषय है और भार,त चीनी पीएलए की सभी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए है। भारतीय सेना भी अपनी तरफ अपनी मौजूदगी बनाए रखेगी जो पीएलए के समान ही है। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा एलएसी से लगे कई क्षेत्रों में भारत और चीन की सेनाओं के बीच लगभग 17 महीनों से गतिरोध बना हुआ है।यह चिंता का विषय है कि बड़े पैमाने पर जमावड़ा हुआ है और यह जारी है और उस तरह के जमावड़े को बनाए रखने के लिए, चीन की ओर बुनियादी ढांचे का इसी पैमाने का विकास भी हुआ है।लेकिन इससे क्या होगा, खासकर अगर वे दूसरी सर्दियों के दौरान भी वहां पर बने रहना जारी रखते हैं, तो निश्चित रूप से इसका मतलब है कि हम एक तरह की एलसी नियंत्रण रेखा की स्थिति में होंगे, हालांकि वैसी सक्रिय एलसी नहीं होगी जैसा कि पश्चिमी मोर्चे पर है।चीन ने ऐसे समय गतिरोध क्यों शुरू किया जब दुनिया कोविड-19 महामारी से जूझ रही थी और जब उसके सामने देश के पूर्वी समुद्र की ओर कुछ मुद्दे थे। उन्होंने कहा, ‘जबकि यह सब चल रहा हो, एक और मोर्चे को खोलने की बात समझना मुश्किल है।विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता के हालिया बयान का हवाला दिया और कहा कि उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि उत्तरी सीमा पर जो कुछ भी हुआ है, वह चीन की ओर से व्यापक पैमाने पर सैन्य जमावड़े और विभिन्न प्रोटोकॉल का पालन न करने के कारण है। अन्य हथियार और उपकरण जो हमने सोचा था कि हमें भविष्य के लिए चाहिए, उन पर भी हमारा ध्यान गया है। पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद पूर्वी लद्दाख में पिछले साल 5 मई को भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच सीमा गतिरोध शुरू हुआ था।

सतीश कुमार